Jugalbandi

Translator : Rekha Sethi Vani Prakashan; First Edition (4 June 2025). ISBN-10 ‏ : ‎ 9369442286 ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9369442287

संगीत में जुगलबंदी का जादू सर चढ़कर बोलता है। जब मैं अनुवाद पर सोचती हूँ तब मुझे अनुवाद के लिए यही शब्द सबसे सार्थक लगता है। अनुवाद लेखक और अनुवादक के बीच की जुगलबंदी है…मैत्रीपूर्ण प्रतिस्पर्धा! मूल और अनूदित रचनाएँ – दोनों स्वतंत्र सर्जनात्मक कृतियाँ हैं, जिनकी साहित्य की दुनिया में अपनी-अपनी जगह है। जुगलबंदी की तरह साथ-साथ और स्वतंत्र! 

अनुवाद करना मेरे लिए अपने भीतर के कवि से संवाद करने जैसा है। प्रस्तुत पुस्तक में, अँग्रेज़ी की समकालीन अट्ठारह स्त्री-कवियों के परिचय और अनुवाद हैं। जिन कवियों का चयन किया गया, वे अपनी संवेदना, शिल्प और सामाजिक दृष्टि में एक दूसरे से भिन्न हैं; उनकी सामाजिक परिस्थितियाँ अलग हैं; भौतिक उपस्थिति देश-दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक विस्तृत है — इस तरह जो विविधवर्णी संकलन तैयार हुआ उसके माध्यम से हमारे सामने समकालीन अँग्रेज़ी स्त्री-कविता की पूरी तस्वीर बनती है।  

इन कविताओं में हिंदी और अँग्रेज़ी प्रतिद्वंदी भाषाएँ नहीं हैं। उनके ऊपर औपनिवेशिकता का भी कोई दबाव नहीं बल्कि जैसे दो अन्य भारतीय भाषाएँ एक ही संस्कृति, एक ही भाव को अपने में समेटे हुए एक-दूसरे के अगल-बगल खड़ी नज़र आती हैं, वैसे ही यहाँ हिंदी-अँग्रेज़ी जुगलबंदी में हैं। जैसे प्रिज़्म से गुज़रती रोशनी अनेक रश्मियों में बिखर जाती है, वैसे ही इस संकलन से गुज़रते हुए पाठक को कविता के कई फॉर्म, कई रूप, कई भाव-बोध एक साथ देखने को मिलेंगे; जो रोचक होंगे और विस्तृत भी; इसी विश्वास के साथ… 

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